२१ जून को लगने जा रहा है सूर्य ग्रहण
यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा इसलिए इसका बड़ा प्रभाव भी देखने को मिलेगा
देहरादून। दिनांक 21 जून 2020 आषाढ़ कृष्ण अमावस्या दिन रविवार को सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। दिन में छा जायेगा अंधेरा- दिखेंगे आकाश में तारे। 21 जून 2020 में होने वाला कंकणाकृति सूर्य ग्रहण वैज्ञानिकों के लिए शोध का विषय और आम आदमी के लिए कौतुहल का विषय बनेगा। वर्ष 2009 के बाद इस प्रकार की खगोलीय घटना 12 साल की प्रतिक्षा के पश्चात आयेगी। सूर्य ग्रहण तब होता है जब चन्द्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है। इस दौरान चन्द्रमा की छाया धरती पर पड़ती है और छाया पड़ती है वहां आंशिक अंधेरा हो जाता है। ऐसे में सूर्य को नंगी आंखों से नहीं देखना चाहिए। यह सूर्य ग्रहण छल्लेदार सूर्य ग्रहण होगा जिसका ज्योतिष शास्त्र में विशेष महत्व अभिव्यक्त किया गया है। 21 जून को साल का पहला सूर्य ग्रहण पड़ रहा है। यह ग्रहण भारत में दिखाई देगा इसलिए इसका बड़ा प्रभाव भी देखने को मिलेगा। देश में दिखाई देने के कारण इस ग्रहण का भारत पर प्रभाव पड़ेगा। इस ग्रहण का अशुभ प्रभाव 8 राशियों पर रहेगा और 4 राशि वाले लोग ग्रहण के बुरे प्रभाव से बच जायेंगे। इस ग्रहण के अशुभ प्रभाव से तूफान, भूकम्प तथा अन्य प्रकार की प्राकृतिक आपदाएं आ सकती है। इस ग्रहण का असर भारत सहित नेपाल, पाकिस्तान, सउदी अरब, यूएई, एथोपिया, कांगो आदि देशों में दृष्टिगोचर हो सकता है।
वृश्चिक राशि वाले व्यक्तियों को विशेष ध्यान रखना होगा
मेष, सिंह, कन्या और मकर राशि वालों पर ग्रहण का अशुभ प्रभाव प्रायः नहीं होगा। जबकि वृषभ, मिथुन, कर्क, तुला, वृश्चिक, धनु, कुंभ और मीन राशि वाले लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए। इसमें विशेष रूप से वृश्चिक राशि वाले व्यक्तियों को विशेष ध्यान रखना अपेक्षित होगा। कंकणाकृति सूर्य ग्रहण होने के साथ ही यह ग्रहण रविवार को होने से और भी प्रभावी हो गया है।
भारतीय भू-भाग पर इस ग्रहण को सुबह 10 बजे से लेकर 2:30 बजे तक की समयावधि में देखा जा सकेगा। दिल्ली में रवि बिम्ब 94 प्रतिशत ग्रसित होगा। दिल्ली में ग्रहण का समय एवं दृश्याकृति इस प्रकार रहेगी कि सुबह 10:20 पर ग्रहण का आरम्भ होगा, मध्य 12:02 पर होगा ग्रहणान्त 01:48 पर होगा इस प्रकार कुल पर्व काल तीन 3 घंटा 28 मिनट रहेगा। यह ग्रहण मृगशिरा नक्षत्र एवं मिथुन राशि में हो रहा है। ग्रहण का अंत आद्रा नक्षत्र में होगा।
देहरादून में ग्रहण का आरम्भ 10:24, मध्य 12:05 और समाप्ति 01:50 पर होगी। हरिद्वार में ग्रहण आरम्भ 10:25, मध्य 12:06 और समाप्ति 01:51 पर होगी। चमोली में ग्रहण का आरम्भ 10:27, मध्य 12:09 और समाप्ति 01:54 पर होगी। ग्रहण का सूतक काल 20 जून 2020 शनिवार की रात्रि में 10:20 से प्रारम्भ होगा। सूतक में शिशु, वृद्धों एवं रोगी को छोड़कर अन्य किसी को भोजन आदि नहीं करना चाहिए। गर्भवती महिलाओं को धारदार चाकू, छुरी, दरांती, गंडासा आदि से फल, सब्जी इत्यादि ग्रहण काल में नहीं काटने चाहिए।
ग्रंथों के अनुसार सूतक काल में पूजा पाठ और देवी देवताओं की मूर्तियों को छूने की मनाही है इसलिए मंदिर इत्यादि के कपाट बंद कर दिये जाते हैं और ग्रहण के उपरांत ही खोले जाते हैं। इस काल में कोई शुभ कार्य करना अच्छा नहीं माना जाता। सूर्य ग्रहण के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए प्रभावित राशि वाले लोगों को ग्रहण काल के दौरान मृत्युंजय जप आदि करना चाहिए। गायत्री मंत्र का जाप भी इसमें लाभदायक होता है। इसके अतिरिक्त जरूरतमंद लोगों को अनाज दान करें। ग्रहण से पहले तोड़कर रखा हुआ तुलसीपत्र ग्रहण के दौरान खाने से अशुभ असर नहीं होता। कुछ ज्योतिष पंडितों के अनुसार ग्रहण को राहु केतु से भी जोड़ा गया है। इस सम्बन्ध में 2000 वर्ष पूर्व वराह मिहिर ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक वृहत्त संहिता में लोगों की इस भ्रांति को दूर किया है। उनके अनुसार ग्रहण के समय सूर्य में काले धब्बे उत्पन्न हो जाते हैं जिसके कारण सूर्य के चारों ओर एक मण्डल स्थापित हो जाता है। इसके अतिरिक्त ऐसी लहरे उत्पन्न होती हैं जो आयोन और इलैक्ट्रोन्स को उत्पन्न करती हैं। इनका प्रभाव इस विश्व के वायुमण्डल पर पड़ता है और अनेक प्रकार की आपदाओं, घटनाओं को जन्म देती हैं। स्मरण रहे कि 26 दिसम्बर 2019 को भी एक सूर्य ग्रहण पड़ा था। हम देख रहे हैं कि आज विश्व कोरोना जैसी महामारी से त्रस्त हैं। यह महत्वपूर्ण है कि 21 जून को पड़ने वाले सूर्य ग्रहण में चार मुख्य ग्रह वक्री होंगे और एक ही राशि धनु में स्थित होंगे। 26 जून के पश्चात भारत को अपनी सीमाओं पर विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।