ऐसे हों जनप्रतिनिधि जो जनता की समस्याओं के निराकरण में सदैव तत्पर रहें
टीना
देहरादून। चुनाव के दौरान सभी उम्मीदवार बढ़चढ़ कर जनता को आश्वस्त करते हैं और स्वर्णिम स्वप्न दिखाते हैं। भोली भाली जनता उनके आश्वासनों को सत्य समझकर उन पर पूर्ण विश्वास कर अपना मत प्रदान कर उन्हें विजयी बनाती है। चुनाव परिणाम के पश्चात विजयी होकर अपने आश्वासन भूल जाते हैं। जो चुनाव से पहले जनता के पीछे दौड़ते थे अब चुनाव के पश्चात जनता को उनके पीछे दौड़ते देखा गया है। चुनाव में विजयी होने के पश्चात उन्होने जनता को जो आश्वासन दिये थे वह भूलैयों के गलियारे में भटकते दिखते हैं। वे भूल जाते हैं कि उन्होने जनता से क्या-क्या वायदे किये थे। दूसरे चुनाव के आने तक उनका चेहरा दिखाई नहीं देता। परन्तु कुछ ऐसे भी जनप्रतिनिधि देखे गये हैं जो अपनी पूर्ण निष्ठा से अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं। वे जनता के सुख दुःख में सम्मिलित होते हैं उनकी समस्याओं का निराकरण करने में सहायक होते हैं। हम यहां पर ऐसे दो जनप्रतिनिधियों का उदाहरण दे रहे हैं जो पूर्ण निष्ठा से अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे हैं।
इनमें एक हैं मसूरी विधानसभा क्षेत्र के विधायक गणेश जोशी। ये अपने क्षेत्र की समस्याओं के निराकरण में सदैव तत्पर रहते हैं और छोटे-छोटे गांव व क्षेत्रों में जाकर भी जनता की समस्याओं का निराकरण करते हैं। उनसे मिलना जनता के लिए सुलभ है। वे जनता के लिए सदैव उपलब्ध रहते हैं। लॉक डाउन के दौरान भी उन्होने हर क्षेत्र के व्यक्तियों को किसी न किसी रूप में सहायता पहुंचाने का कार्य किया है। चाहे पुलिसकर्मी को मास्क वितरण, जूस व सैनिटाईजर देना हो, सफाई कर्मचारियों को मास्क और सैनिटाइजर प्रदान करना हो, अस्पताल स्टाफ को पीपीई किट व अन्य सामान वितरित करना हो, इसके अलावा जरूरतमंद लोगों को खाद्यान्न वितरण हो या भोजन वितरण उनको सर्वत्र देखा गया है। इस लॉकडाउन अवधि के दौरान वह प्रतिदिन किसी न किसी रूप में लोगों को सामान वितरित करते नजर आये।
विधायक गणेश जोशी ने वेतन के साथ ही निर्वाचन क्षेत्र भत्ते एवं सचिवीय भत्ते यानि कुल आय का ३० फीसदी की कटौती का सहमति पत्र विधान सभा सचिव को भेज दिया। जबकि कई विधायकों ने तो कटौती की सहमति नहीं दी और कुछ ने केवल वेतन में से कटौती की सहमति दी।
दूसरे हैं वार्ड नं० 9 के पार्षद योगेश घाघट। उन्होने भी अपने क्षेत्र में खुद जनता के द्वार जाकर उनकी समस्याओं को सुना और उनका निराकरण करने का हर संभव प्रयास किया। वह ऐसे पहले पार्षद हैं जो खुद जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं को सुनते हैं। उनका कार्यालय का दरवाजा सदैव जनता के लिए खुला रहता है और उन्होने स्वयं अपना मोबाईल नं० लोगों को दिया है जिससे कि जनता को उनसे सम्पर्क करने में कोई कठिनाई न हो। साकेत कालोनी के लेन नं० १ में उन्होने सोक पिट का निर्माण कराया जहां पिछले कई वर्षों से कालोनीवासी जलभराव की समस्या से परेशान थे। आर्य नगर क्षेत्र में मुख्य मार्गो एवं वहां की गलियों में कई वर्ष से टूटी हुई सड़कों का निर्माण कराया एवं डीएल रोड की तरफ जाने वाले बिहारीगढ़ में काला जी के घर के समीप जो मार्ग कई वर्षों से टूटा हुआ था उसका भी निर्माण कराया जिससे क्षेत्र के लोगों को काफी राहत मिली। इसके अतिरिक्त लॉक डाउन के दौरान उन्होने अपने घर में भोजन बनाने की व्यवस्था की एवं निरन्तर जरूरतमंद लोगों को भोजन वितरित किया। आम जनता को मास्क और सैनिटाइजर जो दुकानों पर लॉकडाउन के समय उपलब्ध नहीं हो रहे थे उन्होने घर-घर जाकर मास्क व सैनिटाइजर वितरित किये जिससे लोगों को काफी राहत महसूस हुई और जो लोग मास्क नहीं खरीद पा रहे थे वे भी मास्क का उपयोग करने लगे।
साकेत कॉलोनी में ही प्रो० कुलश्रेष्ठ के साथ मिलकर उन्होने राशन किट भी जरूरतमंद लोगों को वितरित किये। इसके अतिरिक्त जब भी उनको साकेत कॉलोनी एसोसिएशन की मीटिंग में बुलाया गया वे सदैव उपस्थित हुए और आश्वस्त किया कि जो समस्या होंगी उनका निराकरण करने का प्रयास करेंगे। वहीं आर्यनगर में भी उनके द्वारा कई कार्य कराये गये जिससे उनकी छवि एक अच्छे जनप्रतिनिधि के रूप में उभरी है। जनता इस बात को लेकर प्रसन्न है कि उनको पार्षद को ढूंढना नहीं पड़ता अपितु यदि कोई समस्या होती है तो वे उन्हें फ़ोन पर सूचित करते हैं और पार्षद खुद वहां आकर उनकी समस्या सुनते हैं और उनके निराकरण का प्रयास करते हैं।
जनता को घड़ियाली आंसू बहाने वाले जनप्रतिनिधि नहीं चाहिए अपितु कर्मठ तथा कार्यशील जनप्रतिनिधि चाहिए। अगर हर जनप्रतिनिधि कर्तव्यनिष्ठा से अपने दायित्वों का निर्वहन करे तो जनता का उनमें विश्वास जाग्रत रहेगा और यह एक अच्छे लोकतंत्र की परम्परा के लिए लाभकारी सिद्ध होगा।